Published on: January 17, 2026
मुंबई की राजनीति में शुक्रवार का दिन एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना, जिसने 25 साल पुराने 'ठाकरे साम्राज्य' की नींव हिला दी। एशिया की सबसे अमीर नगरपालिका बीएमसी के नतीजों ने न केवल सत्ता का समीकरण बदला, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि अब मुंबई की गलियों में किसका जादू चलेगा। क्या यह मायानगरी में एक नई राजनीतिक विचारधारा के उदय का संकेत है? सस्पेंस से भरी इस चुनावी जंग में जहां बीजेपी ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की, वहीं ओवैसी की पार्टी के प्रदर्शन ने सबको हैरान कर दिया है।
बीजेपी का 'ऑपरेशन मुंबई' सफल: टूटा 25 साल का शिवसेना का तिलिस्म
देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, बीएमसी (BMC) की 227 सीटों पर आए नतीजों ने राजनीतिक जगत में हलचल मचा दी है। करीब ढाई दशकों से सत्ता के केंद्र रहे अविभाजित शिवसेना के वर्चस्व को भारतीय जनता पार्टी ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ने भी 29 सीटों पर शानदार जीत हासिल कर महायुति गठबंधन का पलड़ा भारी कर दिया है। अब 118 सीटों (89+29) के साथ यह गठबंधन बहुमत के 114 के जादुई आंकड़े को पार कर चुका है। देवेंद्र फडणवीस ने शाम को जश्न मनाते कार्यकर्ताओं के बीच इसे मुंबई के विकास और नए युग की शुरुआत करार दिया।

ठाकरे बंधुओं को बड़ा झटका: AIMIM ने राज ठाकरे की मनसे को पछाड़ा
इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू 'मराठी अस्मिता' का दावा करने वाले ठाकरे भाइयों का गिरता ग्राफ रहा। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) महज 65 सीटों पर सिमट गई, जबकि राज ठाकरे की मनसे को सिर्फ 6 सीटें मिलीं। सबसे दिलचस्प मुकाबला असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने दिखाया, जिसने राज ठाकरे से बेहतर प्रदर्शन करते हुए कुल 8 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस 24 सीटों के साथ अपनी स्थिति बचाने में कामयाब रही। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को केवल 1 सीट मिली, जबकि अजित पवार गुट ने 3 सीटों पर कब्जा किया। यह परिणाम दर्शाते हैं कि मुंबई का मतदाता अब ध्रुवीकरण और विकास के नए पैमानों पर अपनी मुहर लगा रहा है।
74 हजार करोड़ का भारी-भरकम बजट और महायुति का नया मेयर
बीएमसी चुनाव केवल पार्षद चुनने की जंग नहीं थी, बल्कि ₹74,427 करोड़ के विशाल बजट वाली संस्था पर नियंत्रण हासिल करने की लड़ाई थी। 15 जनवरी को हुए मतदान में 54.77 प्रतिशत लोगों ने अपने वोट डाले थे, जिसके बाद शुक्रवार को नतीजों ने स्पष्ट कर दिया कि मुंबई की चाबी अब महायुति के पास है। बीजेपी के नेतृत्व में अब 29 में से 25 महानगरपालिकाओं में गठबंधन की सरकार बनने जा रही है। दक्षिण मुंबई के गलियारों में अब नए मेयर को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बीजेपी ने अपने दम पर न केवल अपनी सीटें बढ़ाईं, बल्कि ठाकरे परिवार के उस अभेद्य किले को भी ढहा दिया जो कभी अजेय माना जाता था।
निष्कर्ष
बीएमसी चुनाव 2026 के नतीजों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि मुंबई अब बदलाव की राह पर है। बीजेपी की बड़ी जीत और एआईएमआईएम का बढ़ता प्रभाव यह बताता है कि पारंपरिक वोट बैंक अब बिखर रहे हैं। ₹74 हजार करोड़ की तिजोरी और मुंबई के सुनहरे भविष्य की जिम्मेदारी अब महायुति के कंधों पर है। उद्धव और राज ठाकरे के लिए यह हार आत्ममंथन का विषय है, क्योंकि मुंबई की जनता ने अब विकास और नई राजनीति को प्राथमिकता दी है।