Published on: January 16, 2026
ईरान में बढ़ती हिंसा और सियासी उथल-पुथल के बीच वहां रह रहे करीब 10 हजार भारतीयों की सुरक्षा अब भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। तेहरान से संभावित एयरलिफ्ट, नागरिक और सैन्य विमानों के इस्तेमाल की तैयारी और दूतावास की लगातार चेतावनियां हालात की गंभीरता दिखाती हैं। दूसरी ओर, अमेरिका के तीखे बयान और सैन्य कार्रवाई के संकेत संकट को और गहरा कर रहे हैं। यह सिर्फ निकासी नहीं, बल्कि कूटनीतिक संतुलन की भी बड़ी परीक्षा है।
भारत की रणनीति: हर विकल्प खुला, हर स्थिति पर नजर
ईरान में तेजी से बदलते हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए व्यापक योजना तैयार कर ली है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर नागरिक विमानों के साथ-साथ सैन्य परिवहन विमानों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अनुमान है कि इस समय ईरान में छात्रों, व्यापारियों, तीर्थयात्रियों और पेशेवरों सहित लगभग 10,000 भारतीय मौजूद हैं। सरकार की प्राथमिक योजना राजधानी तेहरान से पहले जत्थे को एयरलिफ्ट करने की है। विदेश मंत्रालय हालात की पल-पल निगरानी कर रहा है और दूतावास के जरिए ज़मीनी स्तर पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
दूतावास की सख्त सलाह: इंतजार नहीं, सतर्कता जरूरी
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट शब्दों में सभी भारतीय नागरिकों से जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की अपील की है। छात्रों से लेकर पर्यटकों तक, सभी को उपलब्ध परिवहन साधनों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। दूतावास ने यह भी चेतावनी दी है कि लोग विरोध प्रदर्शन वाले इलाकों से दूरी बनाए रखें और किसी भी आपात स्थिति में सीधे दूतावास से संपर्क करें। भारत सरकार ने ईरान की यात्रा न करने का परामर्श भी जारी किया है, जिससे साफ है कि हालात सामान्य नहीं माने जा रहे।

अमेरिका के बयान से बढ़ा तनाव, अंतरराष्ट्रीय दबाव तेज
ईरान संकट को लेकर अमेरिका का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई होती है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने सैन्य हस्तक्षेप की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। इसके साथ ही, ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा पहले ही वैश्विक दबाव बढ़ा चुकी है। इन बयानों से क्षेत्र में अस्थिरता और विदेशी नागरिकों की चिंता दोनों गहराती दिख रही हैं।
निष्कर्ष | मानवीय जिम्मेदारी और कूटनीतिक संतुलन की कसौटी
ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी भारत के लिए सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और भरोसे का सवाल है। सरकार की तैयारी बताती है कि किसी भी हालात से निपटने का इरादा साफ है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह संकट कितनी जल्दी थमता है, लेकिन फिलहाल भारत की नजर हर कदम पर अपने नागरिकों की सुरक्षा पर टिकी है।