Published on: February 18, 2026
दिल्ली में आयोजित इंडिया AI समिट 2026 के बीच एक प्रस्तुति ने अचानक पूरे आयोजन को विवाद के केंद्र में ला खड़ा किया। गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने जिस ‘रोबो डॉग’ को स्वदेशी एआई इनोवेशन बताया, वह बाद में एक चीनी कंपनी का कमर्शियल मॉडल बताया जाने लगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तकनीकी विशेषज्ञों की पड़ताल ने मामले को तूल दे दिया। बढ़ती आलोचना के बीच सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए यूनिवर्सिटी को एक्सपो स्थल खाली करने का निर्देश दिया। आखिर इस रोबो डॉग की असली कहानी क्या है?
मंच पर चमका ‘रोबो डॉग’, फिर बदली हवा
इंडिया AI समिट 2026 में देशभर के संस्थानों और स्टार्टअप्स ने अपनी तकनीकी उपलब्धियां पेश कीं। इसी मंच पर गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने एक उन्नत चार पैरों वाला ‘रोबो डॉग’ प्रदर्शित किया। इसे यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का स्वदेशी प्रोजेक्ट बताया गया। दावा किया गया कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिसर्च का परिणाम है और भारत में विकसित किया गया है। शुरुआत में दर्शकों ने इसे उत्साह के साथ देखा। स्टॉल पर भीड़ उमड़ी और कई लोगों ने इसे भारतीय तकनीक की बड़ी छलांग बताया। लेकिन कुछ ही समय में यह प्रशंसा सवालों में बदलने लगी।
सोशल मीडिया ने खोली परतें
कार्यक्रम के वीडियो और तस्वीरें जैसे ही ऑनलाइन साझा हुईं, रोबोटिक्स और एआई विशेषज्ञों ने इसकी बारीकी से जांच शुरू कर दी। कई यूजर्स ने ‘रोबो डॉग’ की बनावट, डिजाइन और मूवमेंट की तुलना चीन की रोबोटिक्स कंपनी द्वारा बनाए गए मॉडल यूनिट्री Go2 से की। समानताओं के स्क्रीनशॉट और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या यह वास्तव में स्वदेशी विकास था, या पहले से बाजार में उपलब्ध एक चीनी कमर्शियल ‘रोबो डॉग’ को नए नाम से पेश किया गया? यही वह क्षण था जब मामला राष्ट्रीय बहस में बदल गया।

'ओरियन' नाम और गंभीर आरोप
रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस ‘रोबो डॉग’ को ‘ओरियन’ नाम देकर प्रस्तुत किया गया। आरोप है कि चीन में निर्मित तकनीक को भारतीय शोध उपलब्धि के रूप में दिखाया गया। यदि यह सही है, तो यह केवल ब्रांडिंग का मामला नहीं, बल्कि पारदर्शिता और विश्वसनीयता का प्रश्न है। तकनीकी समुदाय का कहना है कि कमर्शियल रूप से उपलब्ध चीनी उत्पाद को बिना स्पष्ट उल्लेख के स्वदेशी इनोवेशन बताना भ्रामक हो सकता है। सोशल मीडिया पर आलोचना तेज हुई और सरकार तक शिकायतें पहुंचीं।

सरकार की कार्रवाई और आगे की राह
विवाद गहराने के बाद सरकारी सूत्रों ने सख्त कदम उठाए। गलगोटियास यूनिवर्सिटी को तुरंत एक्सपो स्थल खाली करने का निर्देश दिया गया। समिट में उनका पवेलियन बंद कर दिया गया और विवादित ‘रोबो डॉग’ को प्रदर्शन क्षेत्र से हटा लिया गया। यह कदम दर्शाता है कि एआई जैसे संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गलत प्रस्तुति को गंभीरता से लिया जाएगा। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या इस मामले में औपचारिक जांच आगे बढ़ेगी और यूनिवर्सिटी अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए क्या कदम उठाती है। यह घटना भारतीय एआई पारिस्थितिकी तंत्र के लिए पारदर्शिता की अहम सीख बनकर उभरी है।
#WATCH | Delhi | Following row over display of a Chinese-made robodog at AI Impact Summit, Galgotias University Professor Dr Aishwarya Shrivastava says," We never claimed that we manufactured it (robodog), it was only a part of our AI investment. It got misinterpreted in a big… pic.twitter.com/xnVUPlQIi0
— ANI (@ANI) February 18, 2026