Published on: January 14, 2026
प्रयागराज के माघ मेले में इस बार आस्था अपने चरम पर है। षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति के दुर्लभ महासंयोग ने त्रिवेणी संगम को श्रद्धा के महासागर में बदल दिया है। ठंड, भीड़ और तड़के की अंधेरी सुबह भी श्रद्धालुओं के उत्साह को रोक नहीं सकी। लाखों लोग पवित्र डुबकी लगाकर पुण्य और मोक्ष की कामना कर रहे हैं। साधु-संतों की उपस्थिति, प्रशासन की सख्त व्यवस्था और धार्मिक मान्यताओं ने इस दिन को ऐतिहासिक बना दिया है।
महासंयोग ने बदली संगम की तस्वीर
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान 14 जनवरी को बना षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति का दुर्लभ संयोग श्रद्धालुओं के लिए किसी महापर्व से कम नहीं रहा। तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही त्रिवेणी संगम के घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड और ठंडे जल की परवाह किए बिना लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई। मान्यता है कि इस दिन संगम स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं। देश के कोने-कोने से आए कल्पवासी और श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव से इस पुण्य अवसर का हिस्सा बने। हर ओर मंत्रोच्चारण, शंखनाद और भक्ति का वातावरण देखने को मिला।
धार्मिक मान्यताएं और आध्यात्मिक प्रभाव
हिंदू धर्मशास्त्रों में षटतिला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन तिल के छह रूपों—स्नान, उबटन, दान, भोजन, तर्पण और हवन—का प्रयोग करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है। खास बात यह रही कि यह संयोग 23 वर्षों बाद मकर संक्रांति के साथ बना, जिससे इसका धार्मिक प्रभाव और बढ़ गया। मान्यता है कि संगम में स्नान करने से हजारों यज्ञों के समान फल मिलता है। साधु-संतों और नागा साधुओं की उपस्थिति ने संगम तट को और दिव्य बना दिया। श्रद्धालु दान-पुण्य कर आत्मिक शांति और समृद्धि की कामना करते नजर आए।
प्रशासनिक तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था
इतनी विशाल भीड़ को संभालने के लिए माघ मेला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। घाटों पर बैरिकेडिंग, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और नावों की तैनाती की गई है। सुरक्षा के लिहाज से हजारों पुलिसकर्मी, एनडीआरएफ और आपदा प्रबंधन दल मुस्तैद हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मेडिकल कैंप और एंबुलेंस तैनात की गई हैं। प्रशासन का अनुमान है कि इस प्रमुख स्नान पर्व पर करोड़ों श्रद्धालु संगम पहुंच सकते हैं। 45 दिनों तक चलने वाले माघ मेले का यह दूसरा बड़ा स्नान दिवस माना जा रहा है, जिससे व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया गया है।
निष्कर्ष
षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति के महासंयोग ने प्रयागराज माघ मेले को आस्था का जीवंत उदाहरण बना दिया है। संगम में उमड़ा जनसैलाब भारतीय संस्कृति, विश्वास और सनातन परंपरा की गहराई को दर्शाता है। यह पर्व केवल स्नान का नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बनकर सामने आया है।