Published on: July 25, 2025
बिहार की राजनीति में एक नया तूफान आ गया है!चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) को बड़ा झटका लगा है, जब एक साथ 38 वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इस मामले में पार्टी के प्रदेश महासचिव रतन पासवान भी शामिल हैं। यह विद्रोह खगड़िया जिले में नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भड़का है, जिसे स्थानीय सांसद राजेश वर्मा की "मनमानी" बताया जा रहा है। यह घटना बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकती है
क्यों भड़का विद्रोह?
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब LJP के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी ने 23 जुलाई को मनीष कुमार (उर्फ नाटा सिंह) को खगड़िया का नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया। पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह निर्णय खगड़िया सांसद राजेश वर्मा के दबाव में लिया गया था। इस नियुक्ति से नाराज कार्यकर्ताओं ने बलुआही में एक बैठक कर सामूहिक इस्तीफे का फैसला किया। इस्तीफा देने वालों ने एक खुला पत्र भी जारी किया, जिसमें पार्टी नेतृत्व से इस "मनमानी" के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
इस्तीफों की चिंगारी: नई नियुक्ति से उपजा असंतोष
इस नियुक्ति से नाराज कार्यकर्ताओं ने बलुआही में एक बैठक कर सामूहिक इस्तीफे का फैसला किया। इस्तीफा देने वालों में पूर्व जिलाध्यक्ष शिवराज यादव, प्रदेश महासचिव रतन पासवान, युवा जिलाध्यक्ष सुजीत पासवान सहित जिले के सभी 7 प्रखंड अध्यक्ष शामिल हैं। नेताओं ने एक खुला पत्र भी जारी किया है जिसमें पार्टी नेतृत्व से इस "मनमानी" के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
शिवराज यादव ने बताया कि यह विरोध केवल जिलाध्यक्ष की नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी में चल रहे "ऊपर से थोपे गए फैसलों" के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक पार्टी नेतृत्व कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनता।
खगड़िया - LJP का राजनीतिक गढ़:
यह घटना और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि खगड़िया LJP के संस्थापक स्वर्गीय रामविलास पासवान की कर्मभूमि रही है। यहीं से उन्होंने पार्टी की नींव रखी थी। स्थानीय नेताओं का कहना है कि पार्टी नेतृत्व अपने ही गढ़ में कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रहा है। वहीं, सांसद राजेश वर्मा के प्रतिनिधि डॉ. पवन जायसवाल ने इन आरोपों को "स्वार्थपूर्ण राजनीति" बताते हुए कहा कि जिलाध्यक्ष की नियुक्ति पार्टी शीर्ष नेतृत्व का निर्णय था।
निष्कर्ष:
यह घटना बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है। एक तरफ जहां चिराग पासवान अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं पार्टी के भीतर से उठ रही यह आवाज उनके लिए चुनौती बन सकती है। आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह विवाद LJP के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकता है, खासकर तब जब विपक्षी दल ऐसे असंतुष्ट नेताओं को अपनी ओर मोड़ने की कोशिश कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान को इस मामले में तुरंत क्षति नियंत्रण की रणनीति बनाने की आवश्यकता है।