Published on: July 25, 2025
भारत सरकार ने डिजिटल स्पेस में बढ़ती अश्लीलता और सॉफ्ट पोर्न कंटेंट पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, 19 वेबसाइट्स, 10 मोबाइल ऐप्स और 57 सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक कर दिया है। उल्लू, ALTT, Desiflix और Big Shots जैसे चर्चित प्लेटफॉर्म्स को निशाने पर लिया गया है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि ‘क्रिएटिव एक्सप्रेशन’ के नाम पर अभद्रता और पोर्नोग्राफी की छूट नहीं दी जा सकती। यह कदम नाबालिगों की सुरक्षा, समाजिक मर्यादा और डिजिटल अनुशासन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। आइए, विस्तार से जानते हैं इस फैसले के पीछे की वजहें।
OTT प्लेटफॉर्म्स पर अश्लीलता के आरोप और सरकार की कार्रवाई
देश में बढ़ते डिजिटल कंटेंट की निगरानी करते हुए केंद्र सरकार ने उन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कड़ा रुख अपनाया है, जो ‘एरोटिक वेब सीरीज़’ के नाम पर आपत्तिजनक सामग्री परोस रहे थे। उल्लू, ALTT, Desiflix, Big Shots जैसे कई ऐप्स पर लंबे समय से अश्लील और सॉफ्ट पोर्न कंटेंट दिखाने के आरोप लगते रहे हैं। Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) को लगातार इस बारे में शिकायतें मिल रही थीं। इन प्लेटफॉर्म्स को IT Rules और Obscenity Laws के उल्लंघन का दोषी पाया गया। जब बार-बार की चेतावनियों के बावजूद कोई सुधार नहीं किया गया, तब यह सख्त कदम उठाया गया।
कौन-कौन से प्लेटफॉर्म्स और अकाउंट्स पर लगी पाबंदी
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने स्पष्ट रूप से बताया कि इस कार्रवाई में 18 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, 19 वेबसाइट्स, 10 मोबाइल ऐप्स (जिनमें Google Play Store पर 7 और Apple App Store पर 3 शामिल हैं), और 57 सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक किया गया है। यह फैसला इंटरमीडियरीज़ के साथ समन्वय में लिया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह की सामग्री डिजिटल माध्यमों से आमजन तक न पहुंचे। यह निर्णय खास तौर पर नाबालिगों की मानसिक सुरक्षा और समाज में डिजिटल अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक ठोस पहल है।
सरकार का सख्त संदेश: क्रिएटिविटी के नाम पर नहीं चलेगी अश्लीलता
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस कदम को स्पष्ट करते हुए कहा, “क्रिएटिव एक्सप्रेशन के नाम पर अश्लीलता और पोर्नोग्राफी की अनुमति नहीं दी जा सकती।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जो भी प्लेटफॉर्म्स समाजिक मूल्यों और कानूनों की अवहेलना करेंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल स्पेस में अभिव्यक्ति की आज़ादी जरूरी है, लेकिन उसकी सीमा तय है और मर्यादा का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर गुणवत्ता और नैतिकता बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।
निष्कर्ष:
इस कार्रवाई से साफ है कि सरकार अब डिजिटल कंटेंट पर नियंत्रण को लेकर बेहद गंभीर है। न सिर्फ कानूनों का पालन जरूरी है, बल्कि समाजिक जिम्मेदारी भी डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स पर होगी। यह निर्णय न केवल अश्लीलता पर लगाम लगाने की दिशा में अहम है, बल्कि देश में एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करने का संदेश भी देता है। अब ज़रूरत है कि अन्य कंटेंट प्लेटफॉर्म्स भी जिम्मेदारी समझें और समाजिक मर्यादाओं का सम्मान करते हुए काम करें।