निमिषा प्रिया की मौत की सजा टल सकती है! यमन में भारतीय धर्मगुरु की पहल पर अंतिम वार्ता की उम्मीद

Published on: July 15, 2025

निमिषा प्रिया की मौत की सजा टल सकती है! यमन में भारतीय धर्मगुरु की पहल पर अंतिम वार्ता की उम्मीद

केरल की नर्स निमिषा प्रिया की यमन में 16 जुलाई को होने वाली सजा-ए-मौत को टालने की आखिरी कोशिशें जोरों पर हैं। सूफी आलिम शेख हबीब उमर बिन हाफिज और भारत के मशहूर सुन्नी नेता कंथापुरम ए पी अबूबक्कर मुस्लियार की कोशिशों से अब नई उम्मीद जागी है। मंगलवार को यमन के धमार शहर में मृतक तलाल अब्दो महदी के परिवार से मुलाकात होने वाली है, जो निमिषा की जिंदगी बचाने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।

धार्मिक नेताओं की मध्यस्थता: एक नया मोड़

भारत के ग्रैंड मुफ्ती के नाम से मशहूर कंथापुरम ए पी अबूबक्कर मुस्लियार ने यमन के प्रभावशाली धार्मिक नेताओं के साथ गहन वार्ता की है। उनकी पहल के बाद ही तलाल के परिवार से संपर्क स्थापित हो सका, जो अब तक किसी भी बातचीत से कतरा रहा था। सूफी विद्वान शेख हबीब उमर बिन हाफिज के हस्तक्षेप ने इस प्रक्रिया को गति दी है। मंगलवार सुबह 10 बजे (यमन समयानुसार) धमार में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में तलाल के एक करीबी रिश्तेदार भी शामिल होंगे, जो हुदैदा स्टेट कोर्ट के चीफ जस्टिस और यमनी शूरा काउंसिल के सदस्य हैं। यह न केवल परिवार को मनाने का प्रयास होगा, बल्कि यमन के अटॉर्नी जनरल से सजा को स्थगित करने की अपील भी की जाएगी।


ब्लड मनी: जीवनदान की अंतिम संभावना

शरिया कानून के तहत, यदि मृतक का परिवार "ब्लड मनी" (रक्तधन) के रूप में मुआवजा स्वीकार कर लेता है, तो आरोपी की सजा माफ की जा सकती है। तलाल की हत्या का मामला केवल एक व्यक्तिगत दुख नहीं, बल्कि धमार के कबीलों के लिए भावनात्मक मुद्दा बन चुका है, जिसके कारण अब तक कोई भी परिवार से समझौता नहीं कर पाया था। कंथापुरम मुस्लियार की मध्यस्थता ने इस जटिल स्थिति में एक नया रास्ता खोला है। यदि परिवार ब्लड मनी पर सहमत हो जाता है, तो निमिषा की फांसी रुक सकती है।

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भारत सरकार की सीमित भूमिका और अंतर्राष्ट्रीय दबाव

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह यमन की कानूनी प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती, लेकिन वह राजनयिक और धार्मिक स्तर पर पूरा प्रयास कर रही है। भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने कहा कि सरकार यमन के प्रभावशाली धार्मिक नेताओं के साथ मिलकर काम कर रही है। इस बीच, केरल सरकार और केंद्र की ओर से निमिषा के परिवार को हर संभव सहायता दी जा रही है।


निमिषा प्रिया: पलक्कड़ की वह नर्स जो यमन की जेल में मौत का इंतजार कर रही है

निमिषा प्रिया, केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली एक नर्स, 2017 में अपने यमनी पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार हुई थीं। 2020 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई, और 2023 में उनकी अंतिम अपील भी खारिज हो गई। यमन की अदालतों ने इस मामले में कोई रियायत नहीं दिखाई, जिससे उनकी नियति अब धार्मिक और राजनयिक हस्तक्षेप पर निर्भर हो गई है।


निष्कर्ष: क्या समय रहते न्याय मिल पाएगा?

16 जुलाई की तिथि नजदीक आ रही है, और निमिषा प्रिया की जान बचाने की उम्मीदें अब धार्मिक नेताओं और ब्लड मनी की सफल वार्ता पर टिकी हैं। यदि यमन का परिवार और सरकार समझौते पर सहमत हो जाते हैं, तो यह न केवल निमिषा के लिए, बल्कि भारत-यमन संबंधों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा। अन्यथा, एक भारतीय नागरिक की नियति विदेशी भूमि पर अंधकारमय हो जाएगी।

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