पेट्रोल पंपों के लिए बड़ा आदेश, 1 अप्रैल से 20% एथेनॉल वाला पेट्रोल ही देश भर में बिकेगा

Published on: February 28, 2026

Indian petrol pump displaying E20 20 percent ethanol blended fuel notice with vehicles refueling
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केंद्र सरकार ने पेट्रोल पंपों के लिए अहम निर्देश जारी करते हुए 1 अप्रैल 2026 से देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, सभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पंपों पर उपलब्ध ईंधन निर्धारित मानकों के अनुरूप हो। इस ईंधन में अधिकतम 20% एथेनॉल होगा और न्यूनतम RON 95 मानक लागू रहेगा। मंत्रालय ने गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य किया है।

क्या है 20% एथेनॉल वाला E20 पेट्रोल

E20 पेट्रोल एक एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल है, जिसमें 80 प्रतिशत पारंपरिक पेट्रोल और 20 प्रतिशत बायो-फ्यूल इथेनॉल मिलाया जाता है। इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और कार्बन उत्सर्जन घटाना है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से पिछले वर्षों में विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत दर्ज की गई है। ऊर्जा सुरक्षा, हरित ईंधन और ग्रामीण आय में वृद्धि—इन तीन प्रमुख लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए E20 पेट्रोल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा रहा है।


RON 95 क्यों अनिवार्य किया गया

सरकार ने 20% एथेनॉल पेट्रोल के साथ न्यूनतम RON 95 मानक लागू किया है। रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) ईंधन की गुणवत्ता और इंजन में नॉकिंग के प्रतिरोध को दर्शाता है। उच्च RON वाला ईंधन दबाव में अधिक स्थिर रहता है और इंजन प्रदर्शन को सुरक्षित रखता है। एथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग अधिक होने के कारण यह मिश्रण तकनीकी रूप से बेहतर माना जाता है। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक इंजनों के लिए यह मानक उपयुक्त है, हालांकि पुराने मॉडलों में कुछ समायोजन की आवश्यकता हो सकती है।

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वाहनों पर प्रभाव और उद्योग की तैयारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, 2023 के बाद निर्मित अधिकांश वाहन E20 पेट्रोल के अनुकूल हैं। फिर भी कुछ वाहन उपयोगकर्ताओं ने माइलेज में 3 से 7 प्रतिशत तक कमी की आशंका जताई है। पुराने इंजन उच्च एथेनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन नहीं किए गए थे, जिससे शुरुआती चरण में तकनीकी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इसी बीच कुछ वाहन कंपनियों ने कन्वर्जन किट बाजार में उतारी हैं, जिससे पुराने मॉडलों को नए ईंधन के अनुरूप बनाया जा सके। उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि जागरूकता और तकनीकी समर्थन इस परिवर्तन को सुचारु बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।


आगे क्या: ऊर्जा नीति में दीर्घकालिक बदलाव

20% एथेनॉल पेट्रोल की अनिवार्यता भारत की ऊर्जा नीति में संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। इससे कच्चे तेल के आयात बिल में कमी, पर्यावरणीय लक्ष्यों की पूर्ति और कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में फ्लेक्स-फ्यूल इंजन और उन्नत बायोफ्यूल तकनीक को बढ़ावा मिलेगा। यदि आपूर्ति, गुणवत्ता और वाहन अनुकूलन की प्रक्रिया संतुलित रही, तो यह नीति भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।

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