Published on: July 14, 2025
भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज खिलाड़ी साइना नेहवाल और उनके कोच-पति पारुपल्ली कश्यप ने 7 साल के वैवाहिक जीवन के बाद अलग होने का फैसला किया है। दोनों ने सोशल मीडिया पर संयुक्त बयान जारी कर इसकी पुष्टि की। साइना भारत की पहली ओलंपिक बैडमिंटन मेडलिस्ट हैं, जबकि कश्यप ने खिलाड़ी और कोच दोनों रूप में देश को गौरवान्वित किया है। इस जोड़ी के टूटने ने खेल प्रेमियों को हिला दिया है।
दो सितारों का उदय और मिलन
साइना नेहवाल ने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारत में बैडमिंटन को नई पहचान दी। हैदराबाद की रहने वाली साइना ने 24 अंतरराष्ट्रीय खिताब जीते हैं। वहीं पारुपल्ली कश्यप, जिन्हें पी. कश्यप के नाम से जाना जाता है, 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं और वर्तमान में भारतीय बैडमिंटन टीम के प्रमुख कोच हैं।
दोनों की मुलाकात 2006 में राष्ट्रीय कैंप के दौरान हुई थी, जब कश्यप सीनियर खिलाड़ी और साइना उभरती हुई प्रतिभा थीं। 12 साल के लंबे साथ के बाद 14 दिसंबर 2018 को हैदराबाद में उनकी शादी हुई, जिसे खेल जगत की 'पावर कपल' के रूप में देखा जाता था।
अलगाव के पीछे की वजहें
सूत्रों के अनुसार, दोनों के बीच पेशेवर प्रतिबद्धताओं और व्यक्तिगत मतभेदों ने दूरियां बढ़ाईं। साइना अभी भी सक्रिय खिलाड़ी हैं और 2024 पेरिस ओलंपिक की तैयारी कर रही हैं, जबकि कश्यप कोचिंग और प्रशासनिक भूमिकाओं में व्यस्त हैं।
एक करीबी सूत्र ने बताया, "साइना का फोकस अपने खेल पर है, जबकि कश्यप नई प्रतिभाओं को तराशने में लगे हैं। यह अलगाव समय की मांग थी।"

सोशल मीडिया पर भावुक बयान
दोनों ने इंस्टाग्राम पर लिखा: "हम दोनों ने परस्पर सहमति से अलग होने का निर्णय लिया है। यह हमारा निजी फैसला है और हम आगे भी एक-दूसरे का सम्मान करेंगे। हम अपने प्रशंसकों से निजता का सम्मान करने की अपील करते हैं। पीवी सिंधु ने ट्वीट किया: "दोनों मेरे लिए प्रेरणास्रोत हैं। मैं उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देती हूं।" बैडमिंटन कोच गोपीचंद ने कहा: "यह एक निजी मामला है, हमें उनके फैसले का सम्मान करना चाहिए।"
भविष्य की योजनाएं
सूत्रों के मुताबिक, दोनों पेशेवर तौर पर साथ काम जारी रखेंगे। साइना कश्यप की कोचिंग ले सकती हैं, हालांकि अब उनकी ट्रेनिंग की जिम्मेदारी अन्य कोच्स संभालेंगे।साइना और कश्यप का सफर भले ही अलग-अलग रास्तों पर निकल गया हो, लेकिन दोनों ने भारतीय बैडमिंटन को जो योगदान दिया है, वह अमर रहेगा। उनकी यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी प्यार से ज्यादा महत्वपूर्ण सम्मान से अलग होना होता है।