Published on: July 16, 2025
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को बंगालियों को "रोहिंग्या" या "बांग्लादेशी" कहने से पहले शर्म आनी चाहिए, क्योंकि राष्ट्रगान "जन गण मन" की रचना एक बंगाली ने ही की थी। उन्होंने केंद्र सरकार पर सीमा सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा मतदाता सूची में बदलाव कर रही है। इसके जवाब में उन्होंने तीन किलोमीटर लंबा मार्च निकालकर भाजपा को चुनौती दी।
"हम इंच-इंच लड़ेंगे": ममता बनर्जी ने भाजपा को घेरते हुए उठाए ये सवाल
कोलकाता की सड़कों पर एक बार फिर राजनीतिक गर्मी बढ़ गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा और उन पर बंगाल की संस्कृति व अस्मिता को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि भाजपा के नेता बंगालियों को "रोहिंग्या" और "बांग्लादेशी" कहकर अपमानित कर रहे हैं, जबकि यह वही राज्य है जिसने देश को राष्ट्रगान "जन गण मन" दिया।
ममता बनर्जी ने अपने भाषण में कहा, "क्या 'जन-गण-मन' एक बंगाली ने नहीं गाया था? आज वही लोग बंगालियों को बाहरी बता रहे हैं। यह हमारी संस्कृति का अपमान है।" उन्होंने केंद्र सरकार पर सीमा सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूछा, "सीमा पर किसका नियंत्रण है? गृह मंत्री कौन है? अगर कोई हवाई जहाज से भी आता है, तो केंद्र सरकार को पता होता है। फिर अवैध घुसपैठ की जिम्मेदारी किसकी है?"
ममता ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव नजदीक आते ही मतदाता सूचियों में बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा, *"बिहार में 30.5 लाख मतदाताओं के नाम काट दिए गए। महाराष्ट्र और दिल्ली में भी यही हुआ। अब वे बंगाल में यही करना चाहते हैं, लेकिन हम इंच-इंच लड़ेंगे।"* उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई भाजपा के लिए काम करता है, तो उसे "दलाली" करने से रोका जाना चाहिए।
"बीजेपी, खेला होबे... बस इंतजार करो!"
इसके बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता की सड़कों पर तीन किलोमीटर लंबा मार्च निकाला, जिसमें हजारों समर्थक शामिल हुए। इस दौरान भाजपा के खिलाफ जोरदार नारेबाजी हुई। मार्च के बाद उन्होंने भावुक होकर कहा, "मैंने तय किया है कि अब और ज्यादा बंगाली में बोलूंगी। अगर मुझे डिटेंशन कैंप में भी डालना हो, तो डाल दो। बीजेपी, खेला होबे... बस इंतजार करो!"

राजनीतिक पृष्ठभूमि: क्यों यह मुद्दा गरमाया?
ममता बनर्जी का यह हमला उस वक्त आया है जब भाजपा के कुछ नेताओं ने बंगाल में "अवैध घुसपैठ" को लेकर सवाल उठाए थे। कुछ नेताओं ने बंगालियों को "रोहिंग्या" और "बांग्लादेशी" तक कह डाला, जिससे टीएमसी में आक्रोश फैल गया। ममता ने इसे बंगाल की अस्मिता पर हमला बताते हुए जवाबी हमला किया।
इसके पीछे एक बड़ा कारण 2024 के लोकसभा चुनावों की तैयारी भी है। बंगाल में भाजपा और टीएमसी के बीच सीधा मुकाबला है, और दोनों पार्टियां जातीय और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रही हैं। ममता बनर्जी का यह भाषण उनकी "बंगाली अस्मिता" की रणनीति का हिस्सा है, जिससे वे भाजपा को एक "बाहरी" पार्टी के रूप में पेश करना चाहती हैं।
निष्कर्ष: क्या बंगाल में फिर से गरमाएगी राजनीति?
ममता बनर्जी का यह आक्रामक रुख साफ संकेत देता है कि बंगाल में अगले चुनावों तक राजनीति और गरमा सकती है। भाजपा और टीएमसी के बीच यह टकराव अब सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि बंगाल की पहचान का भी मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह लड़ाई और तीखी हो सकती है, क्योंकि दोनों पार्टियां अपने-अपने वोट बैंक को लामबंद करने में जुटी हुई हैं।