Published on: December 19, 2025
लोकसभा में भारी हंगामे और तीखे विरोध के बीच सरकार ने ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G बिल 2025 को पारित कराकर ग्रामीण रोजगार नीति की दिशा बदल दी। यह नया कानून दो दशक पुरानी मनरेगा योजना की जगह लेगा और ग्रामीण परिवारों को हर साल 125 दिनों के अकुशल रोजगार की कानूनी गारंटी देगा। बिल के पारित होते ही विपक्ष ने इसे महात्मा गांधी की विरासत से जोड़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया, जिससे संसद का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
मनरेगा की जगह नया कानून, ग्रामीण रोजगार की नई परिभाषा
गुरुवार को संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा ने ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल 2025’ को मंजूरी दे दी। इस बिल के लागू होने के साथ ही 20 वर्षों से चल रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का स्थान एक नए कानूनी ढांचे ने ले लिया है। सरकार का दावा है कि यह कानून ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन तक अकुशल मजदूरी का रोजगार सुनिश्चित करेगा और आजीविका के अवसरों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करेगा। सरकार इसे ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मान रही है।
सरकार का पक्ष: ग्राम स्वराज की ओर कदम
बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं है और पूरा देश उनके लिए समान है। शिवराज सिंह चौहान ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधीजी केवल एक नाम नहीं बल्कि एक विचार हैं, जो आज भी देश के मार्गदर्शक हैं। उनके अनुसार यह नया कानून गांधीजी के ग्राम स्वराज की भावना को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने का प्रयास है और इसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।

विपक्ष का तीखा विरोध और सदन में हंगामा
बिल के पारित होते ही लोकसभा का माहौल पूरी तरह गर्मा गया। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसद अपनी सीटों से उठकर वेल ऑफ द हाउस में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध इतना उग्र हो गया कि सांसदों ने बिल की प्रतियां फाड़ दीं और उन्हें स्पीकर की कुर्सी की ओर उछाल दिया। विपक्ष ने इस विधेयक को महात्मा गांधी के नाम और उनकी विरासत का अपमान बताया। उनका आरोप था कि सरकार मनरेगा से गांधीजी का नाम हटाकर उनकी स्मृति को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जिसे वे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे।
रोजगार कानून बना सियासी टकराव का केंद्र
VB-G RAM G बिल 2025 का पारित होना जहां सरकार के लिए एक बड़ी विधायी सफलता माना जा रहा है, वहीं यह कानून विपक्ष के लिए संघर्ष का नया मोर्चा बन गया है। एक ओर सरकार इसे ग्रामीण भारत के विकास और रोजगार सुरक्षा का मजबूत आधार बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे गांधीवादी मूल्यों से जोड़कर तीखा विरोध दर्ज करा रहा है। यह स्पष्ट है कि ग्रामीण रोजगार से जुड़ा यह नया कानून आने वाले समय में न केवल नीति स्तर पर बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में भी बना रहेगा।