Published on: December 27, 2025
केंद्रीय बजट 2026 को लेकर एक बार फिर तारीख को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वजह है 1 फरवरी 2026 का रविवार होना। हर साल इसी दिन बजट पेश करने की परंपरा है, लेकिन इस बार सवाल उठ रहा है कि क्या संसद रविवार को खुलेगी या बजट सोमवार को पेश होगा। रिपोर्ट्स, मंत्रियों के बयान और संसदीय परंपराएं इस ओर इशारा कर रही हैं कि सरकार कोई असामान्य कदम उठा सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो यह बजट पेश करने के इतिहास में एक अहम उदाहरण बन सकता है।
1 फरवरी और बजट की बदली हुई परंपरा
भारत में 2017 से पहले आम बजट फरवरी के आखिरी दिन पेश किया जाता था। उस समय नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत तक सरकार “वोट ऑन अकाउंट” के जरिए खर्च चलाती थी। लेकिन 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस व्यवस्था को बदल दिया। इसके बाद से बजट हर साल 1 फरवरी को पेश किया जाने लगा, ताकि संसद से इसे मार्च के अंत तक मंजूरी मिल सके और 1 अप्रैल से नया बजट सीधे लागू हो जाए। इसी परंपरा के तहत 2026 का बजट भी 1 फरवरी को तय किया गया, लेकिन इस बार तारीख रविवार पड़ने से चर्चा शुरू हो गई है।
रिपोर्ट क्या कहती हैं और क्यों है रविवार अहम
प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़ी रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर संसदीय परंपराओं का पालन किया गया तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को ही बजट पेश कर सकती हैं, भले ही वह दिन रविवार हो। अधिकारियों का कहना है कि बजट की तारीख जानबूझकर ऐसी रखी जाती है, जिससे उसे नए वित्तीय वर्ष से पहले पूरी तरह लागू किया जा सके। अगर बजट टलता है, तो प्रक्रिया में देरी हो सकती है, जिसका असर योजनाओं और खर्चों पर पड़ सकता है। इसी वजह से सरकार रविवार को भी संसद की बैठक बुलाने पर विचार कर सकती है।
मंत्रियों के बयान और पहले के उदाहरण
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ किया है कि संसद से जुड़े ऐसे फैसले समय रहते कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स द्वारा लिए जाते हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि खास परिस्थितियों में संसद ने पहले भी रविवार को बैठकें की हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में और 13 मई 2012 को संसद ने रविवार को काम किया था। ऐसे उदाहरणों को देखते हुए यह संभावना मजबूत हो जाती है कि सरकार इस बार भी परंपरा से हटकर रविवार को बजट पेश कर सकती है।
निष्कर्ष
अगर 1 फरवरी 2026 को रविवार के बावजूद बजट पेश किया जाता है, तो यह सरकार की तैयारी और समयबद्ध नीति को दर्शाएगा। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि नया वित्तीय वर्ष बिना किसी रुकावट के शुरू हो और योजनाओं को समय पर धन मिल सके।