Published on: July 29, 2025
राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी नोंक-झोंक हुई। खड़गे ने पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी पूछी, तो नड्डा ने उनके 'मेंटल बैलेंस' पर सवाल उठाकर विवाद खड़ा कर दिया। हंगामे के बाद नड्डा ने माफी मांगी, जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवादियों के खात्मे का दावा करते हुए सरकार का पक्ष रखा। यह घटना सदन की कार्यवाही में भावनाओं की उष्मा को उजागर करती है।
सदन में आग उगलती बहस: नड्डा-खड़गे की टकराहट
मंगलवार को राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी सीधे प्रधानमंत्री पर डाली। उन्होंने चुनौती दी: "अगर कोई जवाबदेह नहीं, तो पीएम स्पष्टीकरण दें!" भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जवाब में खड़गे पर व्यक्तिगत प्रहार करते हुए कहा, "आपका मेंटल बैलेंस डिस्टर्ब है। 11 साल से विपक्ष में बैठे हो, इसलिए ऐसी भाषा बोल रहे हैं।" यह टिप्पणी विपक्ष के लिए चिंगारी साबित हुई, और सदन में कोहराम मच गया।
माफीनामा का दौर: नड्डा का पलटवार फिर पीछे हटना
खड़गे नड्डा के 'मेंटल बैलेंस' वाले बयान से आगबबूला हो गए। उन्होंने जोर देकर कहा, "मैं यह अपमान नहीं सहूँगा!" विपक्ष के दबाव में नड्डा ने अपने शब्द वापस लेते हुए कहा, "अगर भावनाएं आहत हुईं, तो माफी मांगता हूँ।" सदन के रिकॉर्ड से यह विवादित टिप्पणी हटा दी गई। यह घटना दिखाती है कि कैसे संसदीय बहसें व्यक्तिगत आक्षेपों की भेंट चढ़ जाती हैं, जबकि मुद्दे गौण हो जाते हैं।
सरकार का पक्ष: राजनाथ ने आतंकवाद पर दिया मजबूत जवाब
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों ने पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' के तीन सदस्यों को मार गिराया है। उन्होंने सेना की प्रशंसा करते हुए कहा, "आतंक के खिलाफ हम किसी भी हद तक जाएँगे।" यह बयान सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को रेखांकित करता है, लेकिन विपक्ष ने इसे 'छुपे हुए असफलताओं का पर्दाफाश' बताया।
निष्कर्ष: राजनीति बनाम सुरक्षा का अंतर्द्वंद्व
इस पूरी घटना ने दो सच्चाइयों को उजागर किया। पहला, संसदीय बहसें अक्सर राजनीतिक रंजिशों का शिकार हो जाती हैं, जैसा कि नड्डा और खड़गे के विवाद में देखने को मिला। दूसरा, आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर भी सरकार और विपक्ष एकजुट होने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप में उलझ जाते हैं। जनता की अपेक्षा है कि नेता राष्ट्रीय सुरक्षा पर ठोस चर्चा करें, न कि शब्दों का युद्ध।