बैंकों में छुपा खजाना: बिना दावेदार के 67 हजार करोड़ रुपये, जागरूकता ही है असली चाबी

Published on: July 29, 2025

बैंकों में छुपा खजाना: बिना दावेदार के 67 हजार करोड़ रुपये, जागरूकता ही है असली चाबी

कल्पना कीजिए कि देश की सबसे बड़ी बैंकों में हजारों करोड़ रुपये बिना किसी दावेदार के यूं ही पड़े हों! वित्त मंत्रालय ने जो आंकड़े हाल ही में साझा किए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जून 2025 की तिमाही तक भारत के बैंकों में कुल ₹67,003 करोड़ ऐसे डिपॉजिट हैं जिन पर किसी ने दावा नहीं किया। इनमें से सबसे ज्यादा पैसा सरकारी बैंकों के पास है, जिसमें एसबीआई सबसे आगे है। सवाल यह उठता है कि ये पैसे किनके हैं और ये इतनी बड़ी राशि आखिर क्यों अनक्लेम्ड रह गई?

बैंकों में बेनाम खजाना: ₹67,003 करोड़ की राशि बिना दावेदार के

वित्त मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बैंकों में ऐसी भारी भरकम राशि जमा है जिसका अब तक कोई दावेदार सामने नहीं आया है। यह रकम जून 2025 तक ₹67,003 करोड़ तक पहुंच चुकी है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरी राशि में 87 प्रतिशत हिस्सा केवल सरकारी बैंकों के पास है। इसमें अकेले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के पास ही ₹19,329.92 करोड़ रुपये पड़े हैं, जिन पर अब तक किसी ने दावा नहीं किया है। पंजाब नेशनल बैंक में ₹6,910.67 करोड़, केनरा बैंक में ₹6,278.14 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा में ₹5,277.36 करोड़ और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में ₹5,104.50 करोड़ ऐसे ही बिना दावेदार के फंड्स के रूप में दर्ज हैं। यह स्थिति न केवल बैंकिंग सेक्टर के लिए बल्कि आम नागरिकों के लिए भी चिंता का विषय है।


प्राइवेट बैंकों में भी जमा हैं लावारिस रकम

यह मुद्दा केवल सरकारी बैंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी बैंकों में भी बड़ी संख्या में अनक्लेम्ड डिपॉजिट्स जमा हैं। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग ₹8,673.72 करोड़ रुपये प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में भी मौजूद हैं जिनका कोई वारिस सामने नहीं आया है। आईसीआईसीआई बैंक में ₹2,063.45 करोड़ रुपये इसी श्रेणी में आते हैं। ये आंकड़े इस बात को साफ दर्शाते हैं कि चाहे वह सरकारी बैंक हो या निजी, दोनों जगह ऐसे खातों की संख्या लगातार बढ़ रही है जिन पर वर्षों से कोई लेन-देन नहीं हुआ।

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हर साल बढ़ रही है 'लावारिस धन' की राशि

वित्त मंत्रालय ने इस मुद्दे पर पहले भी संसद में चिंता व्यक्त की थी। मार्च 2023 में दिए एक उत्तर में यह बताया गया था कि 2022-23 से अनक्लेम्ड डिपॉजिट्स में तेजी से इजाफा देखने को मिला है। औसतन हर साल ₹4,500 करोड़ की अतिरिक्त राशि ऐसे खातों में जुड़ती जा रही है। यह स्पष्ट संकेत है कि नागरिकों को अपने बैंक खातों की स्थिति के बारे में जागरूक करने की तत्काल आवश्यकता है। सरकार की ओर से इन खातों की जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर दी जाती है, फिर भी जागरूकता की कमी के कारण लोग अपने हक का पैसा खो रहे हैं।


निष्कर्ष : जागरूकता से ही बचेगा पैसा

बैंकों में जमा यह अनक्लेम्ड धन न सिर्फ आर्थिक संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि इससे आम जनता का भरोसा भी प्रभावित होता है। सरकार को चाहिए कि वह एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जिससे लोग अपने बंद या निष्क्रिय खातों के बारे में जानकारी लें और उचित प्रक्रिया के तहत अपनी राशि का दावा करें। साथ ही बैंकों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे खातों की जानकारी ग्राहकों या उनके परिवारों तक समय पर पहुंचे। यदि ऐसा होता है, तो न केवल जनता को उसका हक मिलेगा, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास भी बढ़ेगा।

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