Published on: February 27, 2025
भारत के स्वतंत्रता संग्राम की गाथा वीरता, बलिदान और अदम्य साहस से भरी हुई है। इस संघर्ष की धधकती मशाल के सबसे प्रज्वलित नायक थे अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद। 27 फरवरी, 1931—यह वह दिन था जब भारत के इस वीर पुत्र ने अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन अंग्रेज़ों के हाथों जीवित नहीं पकड़े गए। उनका नाम आज भी राष्ट्रभक्ति और साहस का प्रतीक बना हुआ है।
एक क्रांतिकारी की यात्रा: जन्म से संघर्ष तक
चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को भाबरा (अब मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में) हुआ था। बचपन से ही स्वतंत्रता के प्रति उनके हृदय में अपार श्रद्धा थी। महज 14 वर्ष की उम्र में वे असहयोग आंदोलन में भाग लेने लगे। जब उन्हें पहली बार अंग्रेजों ने पकड़ा, तो उन्होंने अपना नाम "आज़ाद", पिता का नाम "स्वतंत्रता", और घर का पता "जेलखाना" बताया। तभी से उनका नाम चंद्रशेखर आज़ाद पड़ गया।
वे महात्मा गांधी की अहिंसक नीति से असहमत होकर क्रांतिकारी रास्ते पर बढ़ चले। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु जैसे वीरों के साथ मिलकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) की स्थापना की और अंग्रेज़ों के खिलाफ क्रांति की ज्वाला प्रज्वलित की।

आज़ादी के लिए संघर्ष और बलिदान
चंद्रशेखर आज़ाद की वीरता की कहानियां प्रेरणा का स्रोत हैं। 1925 में काकोरी कांड में उन्होंने ब्रिटिश सरकार की नाक में दम कर दिया। इसके बाद वे लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिए भगत सिंह और राजगुरु के साथ मिलकर सांडर्स की हत्या की योजना में शामिल हुए। उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों ने ब्रिटिश सरकार को हिला कर रख दिया।
लेकिन 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के आल्फ्रेड पार्क (अब चंद्रशेखर आज़ाद पार्क) में उन्हें घेर लिया गया। चारों ओर से पुलिस ने हमला बोल दिया, लेकिन आज़ाद डटे रहे। जब आखिरी गोली बची, तो उन्होंने अपनी ही बंदूक से खुद को गोली मार ली और हमेशा के लिए "आज़ाद" रह गए।
गृहमंत्री अमित शाह का नमन
गृह मंत्री अमित शाह ने आज ट्विटर पर चंद्रशेखर आज़ाद को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा,
"स्वतंत्रता संग्राम के अदम्य सेनानी, मां भारती के सच्चे सपूत चंद्रशेखर आज़ाद को उनके बलिदान दिवस पर कोटि-कोटि नमन। उनका अद्वितीय साहस और बलिदान देशवासियों के हृदय में सदा अमर रहेगा।"
माँ भारती के अजेय सपूत चंद्रशेखर आजाद जी ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि मातृभूमि के प्रति कर्त्तव्यों की कोई सीमा नहीं होती। युवाओं को आजादी के आंदोलन में सक्रियता से जोड़कर ब्रिटिश हुकूमत की नींद उड़ाने वाले आजाद जी के बलिदान ने आजादी की चिंगारी को महाज्वाला बना दिया।
अमर… pic.twitter.com/hDzxTll50D— Amit Shah (@AmitShah) February 27, 2025
श्रद्धांजलि और संकल्प
आज उनके बलिदान दिवस पर, समूचा राष्ट्र उन्हें नमन करता है। हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि उनके दिखाए रास्ते पर चलकर अपने देश को और भी सशक्त और आत्मनिर्भर बनाएंगे। अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद के प्रति कोटि-कोटि नमन!
"शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।"