Published on: September 2, 2025
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आखिरकार सरकारी बंगले को अलविदा कह दिया है और अब वह दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर स्थित एक निजी फार्महाउस में रह रहे हैं। यह फार्महाउस इनेलो नेता अभय चौटाला का है, जहां वह अस्थायी रूप से तब तक ठहरेंगे, जब तक नया आधिकारिक आवास आवंटित नहीं हो जाता। इस्तीफे के बाद से जनता की नजरों से दूर रहे धनखड़ परिवार के साथ वक्त बिता रहे हैं और सियासी हलकों में उनकी मौजूदा स्थिति को लेकर लगातार चर्चाएं तेज हैं।
छतरपुर में नया ठिकाना
उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के लगभग छह हफ्ते बाद जगदीप धनखड़ ने सरकारी बंगला खाली कर दिया और दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर इलाके के गदाईपुर स्थित फार्महाउस में जा बसे। यह फार्महाउस इनेलो नेता अभय चौटाला का है, जिसे फिलहाल उनके अस्थायी निवास के रूप में चुना गया है। अधिकारियों का कहना है कि धनखड़ यहां तब तक रहेंगे, जब तक टाइप-8 श्रेणी का सरकारी आवास उन्हें आवंटित नहीं हो जाता। फिलहाल आवास मंत्रालय को उनकी ओर से औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।
इस्तीफे के बाद का जीवन
धनखड़ पहले उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में रहते थे, लेकिन 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर उन्होंने मानसून सत्र की शुरुआत में इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल वर्ष 2027 तक तय था, लेकिन अचानक त्यागपत्र देने के बाद से ही वह सार्वजनिक मंचों से दूर हो गए। विपक्ष ने उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठाए, जबकि करीबी सूत्र बताते हैं कि इन दिनों वह परिवार के साथ समय बिता रहे हैं, योग और टेबल टेनिस जैसे शौक पूरा कर रहे हैं।
उपराष्ट्रपति चुनाव की जंग
धनखड़ के पद छोड़ने के बाद अब उपराष्ट्रपति पद के लिए नया चुनाव नौ सितंबर को होना तय है। एनडीए की ओर से महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन उम्मीदवार बनाए गए हैं, जबकि विपक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी मैदान में हैं। इस चुनावी मुकाबले को लेकर सियासी हलकों में हलचल बढ़ गई है और सत्ता-पक्ष व विपक्ष दोनों ही अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत को लेकर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं।
निष्कर्ष
जगदीप धनखड़ का सरकारी बंगले से छतरपुर फार्महाउस तक का सफर अचानक हुए इस्तीफे के बाद कई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे रहा है। जहां वह फिलहाल परिवार और निजी जीवन में व्यस्त हैं, वहीं राजनीतिक हलकों की निगाहें अब आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव पर टिकी हैं। इस घटनाक्रम ने सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए नए समीकरण गढ़ने की स्थिति पैदा कर दी है।