पूर्व CJI चंद्रचूड़ को NLU में प्रोफेसर की नई जिम्मेदारी,रिटायरमेंट के छह महीने बाद नई भूमिका

Published on: May 16, 2025

पूर्व CJI चंद्रचूड़ को NLU में प्रोफेसर की नई जिम्मेदारी,रिटायरमेंट के छह महीने बाद नई भूमिका

पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई.चंद्रचूड़ को सेवानिवृत्ति के छह महीने बाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU) में प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया है। वह यहां विधिक शिक्षा, शोध एवं छात्रों के मार्गदर्शन में अपनी विशेषज्ञता साझा करेंगे। चंद्रचूड़ अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक फैसलों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं, जैसे निजता का अधिकार, समलैंगिकता पर धारा 377 की समाप्ति और स्त्री अधिकारों से जुड़े फैसले। 10 नवंबर 2023 को सेवानिवृत्त होने के बाद यह उनकी पहली बड़ी संस्थागत भूमिका है।

नई जिम्मेदारी और शैक्षणिक योगदान:

पूर्व CJI डी. वाई. चंद्रचूड़ को NLU में प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया जाना भारतीय विधि शिक्षा जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस नई भूमिका में वे विधिक छात्रों को व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों दृष्टिकोणों से प्रशिक्षित करेंगे। वे संविधान, मानवाधिकार, डिजिटल न्याय प्रणाली और न्यायिक नैतिकता जैसे विषयों पर गहन शिक्षण और शोध कार्य का मार्गदर्शन करेंगे। NLU प्रशासन के अनुसार, उन्हें "Distinguished Professor" की उपाधि से सम्मानित किया गया है, जो केवल अत्यधिक अनुभवी और विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को ही दी जाती है। इस भूमिका में उनका अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य स्रोत बनेगा। इससे NLU की वैश्विक रैंकिंग और शैक्षणिक गुणवत्ता में भी सुधार आने की संभावना है।


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सेवानिवृत्ति और न्यायिक योगदान:

जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने 11 नवंबर 2022 को भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला और 10 नवंबर 2023 को 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हुए। अपने एक वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई। उनमें से प्रमुख हैं — निजता को मौलिक अधिकार घोषित करना, समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करना, महिलाओं को सैन्य स्थायी कमीशन में शामिल करने का निर्णय, और डिजिटल इंडिया के तहत ई-कोर्ट्स की शुरुआत करना। उनके फैसलों में "मानव अधिकारों की संवेदनशीलता" और "संविधान की आत्मा" की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। जस्टिस चंद्रचूड़ को एक ऐसे न्यायाधीश के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने टेक्नोलॉजी को न्याय प्रणाली में एकीकृत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए। उनकी न्यायिक दृष्टि उदार, समावेशी और संवेदनशील रही है। यही कारण है कि उनकी शैक्षणिक भूमिका से अब विधिक शिक्षा को भी नई ऊंचाइयां मिलने की उम्मीद है।


निष्कर्ष: कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में नया युग

पूर्व CJI चंद्रचूड़ की NLU में नियुक्ति कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटना है। उनका अनुभव और विशेषज्ञता छात्रों के लिए एक बड़ा संसाधन साबित होगी। उनके फैसलों और विचारों ने भारतीय न्याय प्रणाली को गहराई से प्रभावित किया है, और अब वही ज्ञान नई पीढ़ी तक पहुंचेगा। यह न केवल NLU के लिए, बल्कि पूरे कानूनी शिक्षा तंत्र के लिए गर्व की बात है। चंद्रचूड़ का यह नया सफर न्यायपालिका और शिक्षा के बीच एक सेतु का काम करेगा।

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