Saurabh Dwivedi ने Lallantop क्यों छोड़ा? असली वजह आई सामने, नई यात्रा की बड़ी तैयारी

Published on: January 6, 2026

Saurabh Dwivedi ने Lallantop क्यों छोड़ा

एक विदाई, जिसके पीछे छुपी है नई शुरुआत की कहानी

हिंदी डिजिटल मीडिया की दुनिया में आज एक ऐसी खबर सामने आई, जिसने दर्शकों को चौंका दिया। जिस चेहरे और आवाज़ ने ‘द लल्लनटॉप’ को देश के सबसे लोकप्रिय डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स में शामिल कराया, वही नाम अब उससे अलग हो गया है। सौरभ द्विवेदी ने लल्लनटॉप और इंडिया टुडे ग्रुप से विदाई ले ली है। उनका भावुक संदेश सिर्फ अलविदा नहीं कहता, बल्कि आने वाले किसी बड़े बदलाव का संकेत देता है। सवाल एक ही है—उन्होंने आखिर लल्लनटॉप क्यों छोड़ा, और आगे क्या होने वाला है?


लल्लनटॉप की पहचान बने सौरभ और अचानक आया बड़ा मोड़

डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े लोगों और दर्शकों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं रही। सौरभ द्विवेदी, जिनकी एंकरिंग, भाषा और किस्सागोई ने ‘द लल्लनटॉप’ को अलग पहचान दी, अब इस मंच का हिस्सा नहीं हैं। खबरों के मुताबिक, उन्होंने न केवल लल्लनटॉप बल्कि पूरे इंडिया टुडे ग्रुप से भी अलग होने का फैसला लिया है। कुछ ही देर में यह स्पष्ट हो गया कि यह महज अफवाह नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा कदम है। सौरभ ने खुद सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा कर अपने फैसले की पुष्टि की। यह वही मंच है, जहां से उन्होंने करोड़ों दर्शकों से संवाद किया, चुनावी कवरेज को नई शैली दी और हिंदी डिजिटल पत्रकारिता को मुख्यधारा में मजबूत जगह दिलाई।


शेर में छुपा संकेत और 'अल्पविराम' का गहरा मतलब

अपने संदेश में सौरभ द्विवेदी ने मशहूर शायर नासिर काज़मी की पंक्तियां लिखीं—“यूँ ही आबाद रहेगी दुनिया, हम न होंगे कोई हमसा होगा।” इसके बाद उन्होंने लल्लनटॉप को मान, पहचान और सीख देने के लिए धन्यवाद कहा। लेकिन जिस बात ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, वह था उनका आखिरी वाक्य—“एक अल्पविराम के बाद नई यात्रा की तैयारी।” यहां उन्होंने ‘पूर्ण विराम’ नहीं लिखा, बल्कि ‘अल्पविराम’ चुना। मीडिया जगत इसे इस ओर इशारा मान रहा है कि सौरभ पत्रकारिता छोड़ नहीं रहे, बल्कि अपने करियर को नई दिशा दे रहे हैं। चर्चाओं के मुताबिक, वे किसी बड़े चैनल में जाने के बजाय अपना खुद का मीडिया प्लेटफॉर्म शुरू करने की तैयारी में हैं, जहां वे बिना किसी सीमाओं के अपने अंदाज में काम कर सकेंगे।

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लल्लनटॉप का अगला अध्याय और नई जिम्मेदारी की चुनौती

सौरभ द्विवेदी के जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि लल्लनटॉप आगे किस राह पर चलेगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि मंच की लोकप्रियता और विश्वसनीयता गढ़ने में उनकी भूमिका अहम रही है। ‘लल्लनटॉप शो’ से लेकर जमीनी रिपोर्टिंग तक, उन्होंने दर्शकों के साथ एक भावनात्मक रिश्ता बनाया। अब जानकारी सामने आ रही है कि लल्लनटॉप की संपादकीय कमान कुलदीप मिश्रा संभालेंगे, जो लंबे समय से संस्थान से जुड़े हैं। उनके सामने चुनौती आसान नहीं होगी, क्योंकि दर्शक वर्षों से सौरभ के अंदाज के आदी रहे हैं। लेकिन मीडिया की दुनिया में हर बदलाव अपने साथ नए प्रयोग और नई उम्मीदें भी लेकर आता है।


निष्कर्ष | अंत नहीं, एक नई कहानी की शुरुआत

सौरभ द्विवेदी का लल्लनटॉप से जाना सिर्फ एक इस्तीफा नहीं, बल्कि हिंदी डिजिटल मीडिया में एक नए दौर का संकेत है। जिस तरह उन्होंने ‘अल्पविराम’ का इस्तेमाल किया, वह बताता है कि यह विराम नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की भूमिका है। अब निगाहें उनके अगले कदम पर टिकी हैं, वहीं लल्लनटॉप एक नए नेतृत्व के साथ अपनी पहचान को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। आने वाले समय में साफ होगा कि यह बदलाव दोनों के लिए कितनी बड़ी कहानी लिखता है।

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