Published on: February 25, 2026
एक शब्द, जो दशकों से दर्शकों के दिलों में गूंजता रहा, अब कानूनी सुरक्षा के दायरे में आ गया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि मशहूर अभिनेता का सिग्नेचर अंदाज किसी और की कमाई का जरिया नहीं बन सकता। सोशल मीडिया पर फैलते फर्जी कंटेंट, एआई से तैयार वीडियो और अनधिकृत विज्ञापनों के बीच यह फैसला मनोरंजन जगत के लिए मिसाल बन सकता है। आखिर अदालत ने क्या कहा और इससे डिजिटल दुनिया पर क्या असर पड़ेगा—यही इस खबर का केंद्र है।
मुंबई, न्यायालय का सख्त रुख और ऐतिहासिक आदेश
मुंबई, मंगलवार। बॉम्बे हाई कोर्ट ने शत्रुघ्न सिन्हा पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े मामले में अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। जस्टिस शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने कहा कि अभिनेता का चर्चित डायलॉग ‘खामोश’ उनकी विशिष्ट पहचान का हिस्सा है और इसका अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि नाम, आवाज, छवि और बोलने की शैली व्यक्ति की बौद्धिक संपदा के दायरे में आती है। शत्रुघ्न सिन्हा पर्सनैलिटी राइट्स की यह मान्यता डिजिटल युग में बढ़ते दुरुपयोग के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत ने कई वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिए हैं।
AI, डीपफेक और डिजिटल दुरुपयोग पर रोक
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भले ही ‘खामोश’ एक सामान्य हिंदी शब्द हो, लेकिन जिस खास अंदाज में इसे अभिनेता बोलते हैं, वह उनकी पहचान से जुड़ा है। शत्रुघ्न सिन्हा पर्सनैलिटी राइट्स के तहत एआई जनरेटेड कंटेंट, डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड इमेज और नकली विज्ञापनों पर सख्त रोक लगाई गई है। याचिका में आरोप था कि अभिनेता की छवि का उपयोग अश्लील मीम्स और फर्जी प्रमोशन के लिए किया जा रहा था। अदालत ने माना कि इस तरह का दुरुपयोग प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला सेलिब्रिटी इमेज प्रोटेक्शन और डिजिटल कॉपीराइट सुरक्षा के लिए मिसाल बन सकता है।
20 करोड़ हर्जाना दावा और आगे की राह
याचिका शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा के माध्यम से दायर की गई थी, जिसमें 20 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी की गई है। शत्रुघ्न सिन्हा पर्सनैलिटी राइट्स के इस मामले में अदालत ने फर्जी प्रोफाइल, अनधिकृत मर्चेंडाइज और ऑनलाइन दुरुपयोग पर निगरानी बढ़ाने का संकेत दिया है। इससे पहले अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर, अरिजीत सिंह और आशा भोंसले जैसे कलाकार भी अपनी पहचान की कानूनी सुरक्षा प्राप्त कर चुके हैं। “डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहचान की रक्षा अब अनिवार्य हो गई है,” एक बौद्धिक संपदा विशेषज्ञ ने कहा। आगे की सुनवाई में स्थायी आदेश और क्षतिपूर्ति पर अंतिम निर्णय संभावित है, जिससे मनोरंजन उद्योग में पर्सनैलिटी राइट्स को नई मजबूती मिल सकती है।