Published on: July 20, 2025
वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स (WCL) 2025 में आज होने वाला भारत-पाकिस्तान का मैच अचानक रद्द कर दिया गया। भारतीय खिलाड़ियों—शिखर धवन, हरभजन सिंह, सुरेश रैना और पठान भाइयों—ने देशभक्ति को प्राथमिकता देते हुए मैच से इनकार कर दिया। शिखर धवन ने सोशल मीडिया पर पहलगाम आतंकी हमले और भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को इस फैसले की वजह बताया। WCL आयोजकों ने प्रशंसकों से माफी मांगते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल क्रिकेट के जरिए खुशी फैलाना था, लेकिन देशहित को समझते हुए यह कदम उठाया गया।
खिलाड़ियों का रुख:
आज 20 जुलाई, 2025 को वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स (WCL) के इतिहास में एक अप्रत्याशित मोड़ आया, जब भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मैच रद्द कर दिया गया। यह फैसला भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ियों के सामूहिक निर्णय के बाद लिया गया, जिन्होंने देशभक्ति को क्रिकेट से ऊपर रखा।
शिखर धवन, हरभजन सिंह, सुरेश रैना, इरफान पठान और यूसुफ पठान जैसे अनुभवी खिलाड़ियों ने मैच से खुद को अलग कर लिया। शिखर धवन ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट लिखकर स्पष्ट किया, "11 मई को जो फैसला लिया था, वह आज भी कायम है। मेरे लिए देश सबसे पहले आता है।" उन्होंने अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को इसकी मुख्य वजह बताया।
आयोजकों की प्रतिक्रिया:
WCL प्रबंधन ने इस फैसले को "सम्मानजनक" बताते हुए प्रशंसकों से माफी मांगी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, "हमारा उद्देश्य क्रिकेट प्रेमियों को यादगार पल देना था, लेकिन हम खिलाड़ियों और देश की भावनाओं को समझते हैं।" टूर्नामेंट के शेड्यूल में बदलाव किया जाएगा, और टिकट धारकों को पूर्ण रिफंड दिया जाएगा।
प्रशंसकों की प्रतिक्रिया:
यह घटना उस बढ़ते रुझान को दर्शाती है जहां खिलाड़ी स्पोर्ट्समैनशिप से आगे बढ़कर राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। पहलगाम हमले के बाद भारत में पाकिस्तान के खिलाफ जनभावनाएं तीव्र थीं, और खिलाड़ियों ने इसे ध्यान में रखते हुए यह सख्त कदम उठाया।
सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कई लोगों ने खिलाड़ियों के रुख की सराहना की, तो कुछ ने खेल को राजनीति से जोड़ने पर अफसोस जताया। हालांकि, अधिकांश भारतीय प्रशंसकों ने इसे "देश की गरिमा" से जोड़कर देखा।
निष्कर्ष:
WCL 2025 का यह प्रकरण साबित करता है कि क्रिकेट अब सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान और एकजुटता का प्रतीक बन चुका है। भारतीय खिलाड़ियों के इस फैसले ने एक बार फिर साबित किया कि टीम इंडिया के लिए "जर्सी से पहले तिरंगा" आता है।