सऊदी के 'स्लीपिंग प्रिंस' का 35 वर्ष की उम्र में निधन, लंदन में 15 की उम्र में हादसे के बाद 20 साल कोमा में रहे

Published on: July 20, 2025

सऊदी के 'स्लीपिंग प्रिंस' का 35 वर्ष की उम्र में निधन, लंदन में 15 की उम्र में हादसे के बाद 20 साल कोमा में रहे

सऊदी अरब के 'स्लीपिंग प्रिंस' के नाम से पहचाने जाने वाले प्रिंस वलीद बिन खालिद अल सऊद का निधन हो गया है। वे पिछले 20 वर्षों से कोमा में थे। महज 15 साल की उम्र में लंदन में हुए एक गंभीर कार हादसे के बाद से वे अचेत अवस्था में थे। इस लंबे अरसे में उन्होंने कभी होश नहीं खोला, लेकिन उनके परिवार और देशवासियों को उम्मीद थी कि वे एक दिन जरूर जागेंगे। लेकिन हाल ही में उनके निधन की खबर सामने आई, जिसने पूरे सऊदी अरब को शोक में डुबो दिया।

जब पूरी दुनिया की नजरें 'स्लीपिंग प्रिंस' पर थीं

प्रिंस वलीद बिन खालिद अल सऊद का नाम पहली बार 2005 में सुर्खियों में आया था, जब लंदन में एक भयानक कार दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं। इस हादसे के बाद वे कोमा में चले गए और तब से उनकी हालत लगभग स्थिर बनी रही। मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रिया सीमित थी, लेकिन दिल की धड़कन और अंगों की हलचल बनी हुई थी, जिससे उम्मीद बनी रही कि वे कभी भी होश में आ सकते हैं।

बीते वर्षों में कई बार उनके स्वास्थ्य को लेकर अफवाहें भी सामने आईं। कभी बताया गया कि उन्होंने आँखें खोली हैं, तो कभी कहा गया कि उन्होंने हाथ हिलाया है। इन खबरों को लेकर सोशल मीडिया पर भावनात्मक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलती थीं। लेकिन हर बार उनके परिवार ने संयम बरतते हुए स्थिति स्पष्ट की।


अब पूरी तरह अलविदा: 20 साल बाद रुकी 'स्लीपिंग प्रिंस' की सांसें

सऊदी रॉयल फैमिली की ओर से आधिकारिक बयान में यह पुष्टि की गई कि प्रिंस वलीद बिन खालिद अल सऊद का निधन हो गया है। इस घोषणा के साथ ही पूरे देश में शोक की लहर फैल गई। सोशल मीडिया पर #SleepingPrince ट्रेंड करने लगा और हजारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

प्रिंस वलीद की कहानी एक उम्मीद की मिसाल थी—ऐसी उम्मीद जो दो दशकों तक जीवित रही। उनके पिता, जो खुद सऊदी सरकार में एक उच्च पद पर थे, ने कभी भी उनके जीवन को मशीनों के हवाले नहीं छोड़ा। उनका उपचार सऊदी अरब में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस मेडिकल सेंटर में होता रहा, जहां हर संभव प्रयास किए गए।

विशेषज्ञों की मानें तो इतनी लंबी कोमा की अवस्था में किसी इंसान का जीवित रहना मेडिकल दृष्टि से असामान्य जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। यही वजह थी कि प्रिंस वलीद की स्थिति ने चिकित्सा विज्ञान को भी वर्षों तक चौंकाया और प्रेरित किया।

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एक अध्याय का अंत और यादों की विरासत

'स्लीपिंग प्रिंस' अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी संघर्ष और जीवन की कहानी हमेशा लोगों के दिलों में ज़िंदा रहेगी। वे एक ऐसे प्रतीक बन गए थे जो परिवार, प्रेम और विश्वास की ताकत को दर्शाते हैं। उनके निधन के बाद सऊदी शाही परिवार ने देशवासियों से उनके लिए दुआ करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की अपील की है।

उनकी यह कहानी केवल एक ट्रैजिक एक्सीडेंट की नहीं थी, बल्कि 20 साल तक चले धैर्य, देखभाल और उम्मीद की मिसाल भी थी, जो अब इतिहास का हिस्सा बन गई है।

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